MHD-15 · December 2012 · हिन्दी
IGNOU MHD-15 December 2012 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिन्दी उपन्यास-2 (Hindi Novel-2)
Structured previous year question paper for MHD-15, December 2012 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )
2 सत्रांत परीक्षा
S दिसम्बर, 2012
एम.एच.डी.-15 : हिन्दी उपन्यास-2
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट: प्रथम प्रश्त अनिवार्य है। शेष प्रश्नों में से किन्हीं तीन के उत्तर
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 10x2=20
(क) सदा ही ऐसा हुआ है । संत अपने जीवन में गरीबों के होते हैं। मृत्यु के बाद अमीर उन्हें छीन लेते हैं। भगवान बुद्ध भिक्षा -वृत्ति से जीवन बिताते थे। उनके निर्वाण के बाद राजा उनके प्रचारक और प्रतिनिधि बन गये। ईसा के साथ भी यही हुआ। वही इस संत के साथ हो रहा है। कल यह लोग ताजमहल की लागत का एक गाँधी स्मारक बना देंगे और गाँधी जी के सिद्धांतों को उस महल की नींव में दबा देंगे। जैसे बुद्ध के दाँत को रखकर स्तूप बना दिये गये थे और बुद्ध के अपरिग्रह के नामलेवा सेनायें लेकर साम्राज्य-विस्तार के लिये चढ़ाइयाँ करने लगे थे। गाँधी, बुद्ध और ईसा की तरह अनुकरण के लिये नहीं, केवल पूजा के लिये अवतार बन कर रह जायेगा।
(ख) रियाया जड़ की तरह है और बादशाह दरख़्त की तरह और दरख़्त जड़ से ही मजबूत होता है। ऐ मेरे प्यारे बेटे, जहाँ तक बन सके, रियाया का दिल मत दुखाना और अगर तू ऐसा करेगा तो अपनी जड़ खोदेगा। बेटा, अगर तुझे नेक राह की जरूरत है तो तेरे सामने फ़कीरों-परहेज़ग़ारों का रास्ता खुल पड़ा। जिसे वह खौफ़ है कि वह खुद तकलीफ़ न उठाए उसे भला दूसरों का नुकसान क्यों पसंद आएगा और अगर उसकी तबीयत में यह आदत नहीं है तो उसके मुल्क में अमन-चैन की बू भी नहीं है। अगर तू कानून-कायदे से मज़बूर है तो खुशी इख्तियार कर और अगर तन््हा है, पाक-साफ है तो अपना रास्ता ले। उस मुल्क में खुशहाली की उम्मीद न रख जिसमें बादशाह-रियाया एक-दूसरे से नाराज हैं ।
(ग) बेहद उमस! मन की गहरी से गहरी पर्त में एक अजब-सी बेचैनी। नींद आ भी रही है और नहीं भी आं रही। नीम की डालियाँ खामोश हैं। बिजली के प्रकाश में उनकी छायाएँ मकानों, खपरैलों, बारजों और गलियों में सहमी खड़ी हैं। मेरे अर्धसुप्त मन में असम्बद्ध स्वप्न-विचारों का सिलसिला। स्वर्ग का फाटक। रूप, रेखा, रंग, आकार कुछ नहीं जैसा अनुमान कर लें। अतियथार्थवादी कविताएँ जिनका अर्थ कुछ नहीं जैसा अनुमान कर लें। फाटक पर रामधन बाहर बैठा है। अन्दर जमुना, श्वेतवसना, शान्त, गम्भीर। उसकी विश्वृंखला वासना, उसका वैधव्य, पुरइन के पत्तों पर पड़ी ओस कौ तरह बिखर चुका है, वह वैसी ही है जैसी तन्ना को प्रथम बार मिली थी।
(घ) उन्होंने देखा कि प्रजातंत्र उनके तख़्त के पास ज़मीन पर पंजों के बल बैठा है । उसने हाथ जोड़ रखे हैं । उसकी शक्ल हलवाहों - जैसी और अंग्रेजी तो अंग्रेजी, वह शुद्ध हिन्दी भी नहीं बोल पा रहा है । फिर भी वह गिड़गिड़ा रहा है और वैद्यजी उसका गिड़गिड़ाना सुन रहे हैं । वैद्यजी उसे बार - बार तख्त पर बैठने के लिए कहते हैं और समझते हैं कि तुम गरीब हो तो क्या हुआ , हो तो हमारे रिश्तेदार ही , पर प्रजातंत्र उन्हें बार - बार हुजूर और सरकार कहकर पुकारता है । बहुत समझाने पर प्रजातंत्र उठकर उनके तख्त के कोने पर आ जाता है और जब उसे इतनी सान्त्वना मिल जाती है कि वह मुँह से कोई तुक बात निकाल सकें , तो वह वैद्यजी से प्रार्थना करता है मेरे कपड़े फट गये हैं , मैं नंगा हो रहा हूँ । इस हालत में मुझे किसी के सामने निकलते हुए शर्म लगती है, इसलिए, हे वैद्य महाराज, मुझे एक साफ -सुथरी धोती पहनने को
Q2.औपन्यासिक महाकाप्य के रूप में 'झूठा सच' का मूल्यांकन 10 कीजिए ।
Q3.“ज़िन्दगीनामा में पंजाब के भौगोलिक , सामाजिक और सांस्कृतिक 10 परिवेश की भावात्मक आभिव्यक्ति की गई है । इस कथन कौ समीक्षा कीजिए ।
Q4.“सूरज का सातवाँ घोड़ा' के वस्तु संगठन का विश्लेषण 10 कीजिए ।
Q5.“राग दरबारी' के विशिष्ट चरित्रों की चारित्रिक विशेषताओं का 10 परिचय दीजिए ।
Q6.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणी लिखिए : 5x2=10 (अ) “जमुना' का चरित्र (ब) “राग दरबारी' की शब्दावली (स) “जिन्दगीनामा' की भाषा (द) “झूठा सच' की अंतर्वस्तु