MHD-2 · December 2010 · हिन्दी
IGNOU MHD-2 December 2010 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
आधुनिक हिंदी काव्य (Modern Hindi Poetry)
Structured previous year question paper for MHD-2, December 2010 session (Hindi medium).
Questions: 5
Verified: 26 Jul 2026
0 हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )
8 सत्रांत परीक्षा
° दिसम्बर, 2010
एम.एच.डी.-2 : आधुनिक हिन्दी कविता
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ८ 100
नोट: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन काव्यांशों की व्याख्या कीजिए। (०) मानस मंदिर में सती, पति की प्रतिमा थाप, जलती-सी उस विरह में, बती आरती आप! आँखों में प्रिय-मूर्ति थी, भूले के सब भोग; हुआ योग से भी अधिक उसका विषम-वियोग ! आठ पहर चौसठ घड़ी स्वामी का ही ध्यान छूट गया पीछे स्वयं उससे आत्म ज्ञान!
(0) विजन-वन-वल्लरी पर सोती थी सुहाग-भरी-स्नेह-स्वन-मग्न- अमल-कोमल-तनु तरुणी-जुही की कली, दूग बन्द किये, शिथिल-पत्रांक में वासन्ती निशा थी; पु विरह-विधुर-प्रिया संग छोड़ किसी दूर देश में था पवन जिसे कहते हैं मलयानिल। (०) शिवजी की तीसरी आँख से निकली हुई महाज्वाला में घृतमिश्रित सूखी समिथा-सम कामदेव जब भस्म हो गया रति का क्रन्दन सुन आँसू से तुमने ही तो दृग धोये थे? कालिदास, सच-सच बतलाना रति रोई या तुम रोये थे ? (१) आओ बैठें इसी ढाल की हरी घास पर। माली-चौकीदारों का यह समय नहीं है, और घास तो अधुनातन मानव-मन की भावना की तरह सदा बिछी है-हरी, न्यौतती, कोई आकर रौंदे। (०) प्रात नभ का बहुत नीला शंख जैसे ; भोर का नभ राख से लीपा हुआ चौका बहुत काली सिल जरा से लाल केसर से कि जैसे धुल गयी हो स्लेट पर या लाल खड़िया चाक मल दी हो किसी ने नील जल में या किसी की गौर झिलमिल देह जैसे हिल रही हो। जादू टूटता है इस उषा का अब सूर्योदय हो रहा है।
Q2... भारतेन्दु की काव्य-भाषा और शिल्प का विवेचन कीजिए। 16 मैथिली शरण गुप्त की काव्यगत विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Q3.“राम की शक्तिपूण्य” के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है? 16 सोदाहरण बताइए। महादेवी की प्रतीक योजना पर प्रकाश डालिए।
Q4.धूमिल की कविता का मुख्य स्वर क्या है? सोदाहरण स्पष्ट. 16 कीजिए। पंत की कविता में प्रकृति और नारी सौंदर्य को किस रूप में चित्रित किया गया है? स्पष्ट कीजिए।
Q5.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए।. 2५85-16
(a) प्रयोगवाद
(9) रामदास (०) अज्ञेय की काव्य भाषा (७) मगधा के लोग