MHD-12 · June 2025 · हिन्दी

IGNOU MHD-12 June 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

भारतीय कहानी (Indian Story)

Structured previous year question paper for MHD-12, June 2025 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

कला में स्नातकोत्तर उपाधि (एम. ए. हिन्दी)

(एम.एच.डी.)

सत्रांत परीक्षा

जून, 2025

एम.एच.डी.-12 : भारतीय कहानी

समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50

नोट; प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर

दीजिए।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं दो की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) उन्होंने यह समझा होगा कि उनके मन्नत मानने से बेटी मरने से बच गई। परन्तु प्रत्येक दिन वह जो काम करती है, उससे उसके जीवन का स्त्रीत्व ही दिन-दिन मर रहा है। यह उन्हें कैसे समझाए जब यह बच्ची थी तब एक क्षण में मर जाने के बदले अब हर दिन, हर क्षण, तिल-तिल करके मर रही है, क्या वह यह बात समझते हैं ? नहीं, यही तो आश्चर्य की बात है, उसका पूर्ण विश्वास है कि वह जो कर रही है, ठीक है। वह कार्य भगवान को प्रिय है। उसके बचाए जीवन को इस प्रकार उपयोग में लाये तो उसकी प्रिय सेवा होगी। विवाहित स्त्री जिस कार्य को बुरा मानती है वह अपने उसी कार्य को जीवन का धर्म मानकर चल रही है। इसमें उसके माता-पिता सहायक हैं। बेचारे, वे भी भला क्या करें ? वे भी जाति के रिवाजों

(ख) शैलबाला जरूर अविनाश की साँसों के उतार-चढ़ाव को देखकर उनकी तकलीफ को समझ लेतीं। वे उनकी रग-रग से वाकिफ हैं। लेकिन वह सबकुछ जानते समझते हुए भी दूसरों को इसका अहसास तक नहीं होने देतीं। इसलिए इस वक्‍त अविनाश अपना आखिरी आर्तनाद उन्हीं के कानों तक पहुँचाने की चेष्टा कर रहे थे, जिनके कानों तक वे अपनी बात पहुँचाने की बहुत जरूरत नहीं समझते थे। लेकिन पहुँचाते कैसे ? अविनाश की जी-जान से की गई चेष्टा भी व्यर्थ चली गई।

(ग) गाँव के लोग कहते हैं कि जीवण का दिमाग फिर गया है क्योंकि वह बड़े अस्त-व्यस्त ढंग से जीता है। जीता भी क्‍या है, बस यों ही रहता है। ऊपर से जो कुछ दिखाई देता है, उसे देखकर एक के बाद एक बहुत से लोग यही समझने लगे हैं। कहाँ आज का फटेहाल जीवण और कहाँ आज से चार-पाँच साल पहले का ताँबे की चमचमाती मूर्ति जैसा जीवण! कुछ लोग इसका रहस्य भी समझ गये हैं और उनका विरोध नहीं करते जो समझते हैं कि जीवण का दिमाग फिर गया है। जीवण स्वयं भी इस बात का विरोध नहीं करता क्योंकि उसे मालूम है कि उसे क्या हुआ है।

(घ) राजकुमारी ने पहली मर्तबा इंसान की जबान से इंसान के बोल सुने। यह तो बराबरी के भाव से बेहिचक बात कर रहा है। इसकी नजर में तो कोई छोटा-बड़ा नहीं। राजदरबार का तो माहौल भी अलग। इंसानों के मुखौटी में वहाँ सियार, कौवे, पिल्‍ले, गधे और मेमने इधर-उधर चक्कर लगाते हैं। इंसान की योनि में आकर भी कोई इंसान की मर्यादा नहीं जानता। राजकुमारी होश सँभालने के बाद जिस मर्यादा को देखने की खातिर तरस रही थी, वह पहली मर्तबा कबीर के चेहरे पर साफ नजर आई। उसका हृदय खुशी से हिलोरें लेने लगा।

Q2.“दीदी” कहानी में अभिव्यक्त परिवार और समाज के स्वरूप का वर्णन कीजिए।

Q3.“असमिया' कहानी के विकास में इंदिरा गोस्वामी के योगदान पर चर्चा कीजिए।

Q4.“ओबरे चुरु गन मेरे” कहानी के आधार पर मातृहीन बच्चे की मानसिक स्थिति पर विचार कीजिए।

Q5.[...] (this portion is being re-verified) ’ कहानी के आधार पर भारत विभाजन की ट्रेजडी पर अपने विचार व्यक्त कीजिए ।

Q6.“प्राणधारा' कहानी में चित्रित कालीपट्नम्‌ रामाराव की सामाजिक दृष्टि पर प्रकाश डालिए।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) “बघेई' कहानी की प्रतीकात्मकता

(ख) दलित साहित्य में बाबूराव बागुल का स्थान

(ग) “अपना-अपना कर्ज' की भाषाशैली

(घ) “पाँच पत्र' कहानी में अभिव्यक्त जीवनदर्शन