MHD-12 · December 2020 · हिन्दी
IGNOU MHD-12 December 2020 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
भारतीय कहानी (Indian Story)
Structured previous year question paper for MHD-12, December 2020 session (Hindi medium).
Questions: 7
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
फरवरी, 2021
एम.एच .डी.-12 : भारतीय कहानी
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट: प्रथम प्रश्न अनिवार्य है । शेष में से किन्हीं तीन ग्रश्नों के उत्तर
दीजिए /
Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) उन्होंने मन ही मन सोचा कि अगर इस वक्त कुछ बोलते हैं तो अगले ही पल वे बेभाव हो जाएँगे । नहीं, अभी उन्हें बेभाव होने की इच्छा नहीं है । बल्कि वे आँखें बंद किए हुए ही महसूस करेंगे कि डॉक्टर आया है, जाँच की है । उसके बुलाने पर उन्होंने जवाब नहीं दिया तो उसने संदेह व्यक्त करते हुए इशारे से समझाया है, सेरेब्राल भ्रबोसिस हो सकता है, ऐसा होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है । निर्देश दे रहा है कि एकदम सुलाए रखें । कम्प्लीट रेस्ट ।
(ख) इन अत्यन्त दारुण विचारों से मेरा दिल फटने लगा । एक लम्बी साँस निकल गई । चेन्नम्मा चुपचाप पह्नू का सिरा मरोड़े जा रही थी, मेरा लम्बा साँस छोड़ना देखकर उसने मेरी ओर देखा । उस समय मुख पर चिंता झलक रही थी । चार और लोगों की भाँति अपना घर बसाना छोड़कर यह सीधी-सादी लड़की उनकी एक घृणित रस्म की बलि चढ़ गई है । इस विचार के आते ही मैं अपने को रोक न पाया । मेरी आँखों में आँसू आ गए ।
(ग) गाँव के लोग कहते हैं कि जीवण का दिमाग फिर गया है; क्योंकि वह बड़े अस्त-व्यस्त ढंग से जीता है । जीता भी क्या है, बस यों ही रहता है । ऊपर से जो कुछ दिखाई देता है, उसे देखकर एक के बाद एक बहुत-से-लोग यही समझने लगे हैं । कहाँ आज का 'फटेहाल जीवण और कहाँ आज से चार-पाँच साल पहले का ताँबे की चमचमाती मूर्ति जैसा जीवण ! कुछ लोग इसका रहस्य भी समझ गए हैं और उनका विरोध नहीं करते जो समझते हैं कि जीवन का दिमाग फिर गया है । जीवण स्वयं भी इस बात का विरोध नहीं करता, क्योंकि उसे मालूम है कि उसे क्या हुआ है ।
(घ) भय ! अत्यन्त आदिम, अत्यन्त सहज स्वाभाविक वास्तविकता । अगर किसी में वह उपजा, तो वह स्वयं होता है स्रष्टा । कितने विचारों, कितने आचारों, कितने स्वप्नों, कितनी कल्पनाओं की सृष्टि कर डालता है, एक साथ इतने सारे लोग आगे-पीछे, आजू-बाजू से खड़े, लेकिन भय की कीमिया लादकर जैसे एक-दूसरे से अलग-थलग, भीतर भय की डोर को अनुभव करने के बाद, जैसे और किसी दूसरी चीज़ को, जीव को, या भाव को अनुभव करने की जिम्मेदारी उनकी नहीं रह गई । झूलते रहें धनुष, टंगिया, कटार, ढोए रहें तलवार, बरछे, लाठी -- अब ये सब हैं निरर्थक और गैरज़रूरी बोझ हैं -- सिर्फ इतना कि उन्हें ढोए रहना नियति है ।
Q2.तेलुगु के प्रगतिशील आंदोलन में कालीपट्नम रामाराव के योगदान की चर्चा करते हुए 'प्राणधारा' कहानी की संवेदना पर विचार कीजिए |
Q3.बघेई' कहानी की प्रतीकात्मकता पर प्रकाश डालिए ।
Q4.बाल मनोविज्ञान की दृष्टि से डरे चुरुगन मेरे कहानी पर विचार कीजिए |
Q5.पाँच पत्र” कहानी का जीवन दर्शन समझाइए ।
Q6.टोबा टेक fae कहानी के आधार पर देश विभाजन की त्रासदी का विवेचन कीजिए ।
Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्ो पर टिप्पणी लिखिए : 2x5=10
(क) डी. जयकांतन
(ख) “अपने लिए शोक गीत कहानी के अविनाश
(ग) असमिया कथाकार इंदिरा गोस्वामी
(घ) कश्मीरी कथाकार दीनानाथ नादिम