BSKC-103 · December 2024 · हिन्दी

IGNOU BSKC-103 December 2024 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BSKC-103

Structured previous year question paper for BSKC-103, December 2024 session (Hindi medium).

Questions: 2 · Sections: 2

Verified: 24 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 3 BSKC-103

बी. ए. ( ऑनर्स ) संस्कृत

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2024

बी.एस.के.सी.-103 : लौकिक संस्कृत गद्य साहित्य

समय : 3 घण्टे अधिकतम अक : 100

We:

(i) इस ग्रश्न-पत्र में दो खण्ड By

(४) दोनों ही खण्ड अनिवार्य हैं।

खण्ड--क

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x20=60

(क) न हि त॑ पश्यामि यो ह्परिचितयानया न निर्भरमुपगूढ:, यो वा न विप्रलब्ध:। नियतमियमा लेख्यगतापि चलति, पुस्तमय्यपीन्द्र जालमाचरति, उत्कीर्णाप॒ विप्रलभते, gaat den, चिन्तितापि वज्चयति।

(ख) मिथ्यामाहात्म्यगर्वनिर्भगश्च न॒प्रणमन्ति देवताभ्य:, न पूजयन्ति द्विजातीन, न मानयन्ति ARI नार्चयन्त्यर्चनीयानू, नाभिवादयन्ति अभिवादनाहनि, sas = गुरून। अनर्थकायासान्तरित- विषयोपभोग॑ सुखमित्युपहसन्ति. विद्वज्जनम्‌, जरावैक्लव्यप्रलपितमिति पश्यन्ति वृद्धजनोपदेशम्‌, आत्मप्रज्ञापरिभव. इत्यसूयन्ति. सचिवोपदेशाय, कुप्यन्ति हितावदिने।

(ग) इदमाकर्ण्य किज्चितू स्मित्वेव परितोडवलोक्य च योगी जगाद--“सत्यं न लक्षितो मया समय-वेग:। यौधिष्ठर समये कलितसमाधिरहं वैक्रम-समये उदस्थाम्‌। पुनश्च वैक्रम-समये समाधिमाकलय्य अस्मिन्‌ दुराचारमये समये5हमुत्थितोडस्मि। अहं पुनर्गवा समाधिमेव कलयिष्यामि, किन्तु तावतू सद्क्षिप्य कथ्यतां का दशा भारतवर्षस्येति” ?

(A) अथाहमभ्येत्य ब्रतत्या कयाउपि वृद्धमुत्ता्य 7 a बाल॑ वंशनालीमुखोद्धृताभिरद्धि: फलैश्च toad: शरक्षेपोच्छितस्य लकुचवृक्षस्य शिखरात्यापाषाणपातितै: प्रत्यानीतप्राणवृत्तिमापाद्य तरुतलनिषण्णस्तं जरन्तमब्रवम्‌-तात, क एष: बाल: को वा Far Hea, चेयमापदापन्ना इति।

खण्ड--ख

Q2.निम्नलिखित प्रश्नों में से किन्हीं चार के उत्तर दीजिए :

(क)पण्डिता क्षमाराव के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालिए।

(ख)'पज्चतन्त्र' एवं 'हितोपदेश” की विषय-वस्तु का वर्णन कीजिए

(ग) 'शुकनासोपदेश" का सार अपने शब्दों में लिखिए।

(घ) 'शिवराजविजय” के अनुसार शिवाजी का चरित्र-चित्रण कीजिए। (ड)विश्रुतचरितम्‌ के वैशिष्ट्य पर प्रकाश डालिए।