BHDC-133 · June 2022 · हिन्दी
IGNOU BHDC-133 June 2022 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
BHDC-133
Structured previous year question paper for BHDC-133, June 2022 session (Hindi medium).
Questions: 9
Verified: 10 Aug 2026
मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 4 BHDC-133
स्नातक उपाधि कार्यक्रम ( सी. बी. सी. एस. )
सत्रांत परीक्षा
जून, 2022
बी.एच.डी.सी.-183 : आधुनिक हिन्दी कविता
समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100
नोट : प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में से किन्हीं चार
प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Q1.निम्नलिखित काव्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 12X3=36
(क) मुँह जब लागै तब नहिं छूटै। जाति मान धन सब कुछ लूटे। पागल करि मोहि करे खराब। क्यों सखि साजन नहिं सराब। भीतर-भीतर सब रस चूसे। हँसि हँसि के तन मन धन मूँसे। जाहिर बातन में अति तेज। क्यों सखि साजन नहीं अंग्रेज।
(ख) किसलय-कर स्वागत-हेतु हिला करते हैं, मृदु मनोभाव-सम सुमन खिला करते हैं। डाली में नव फल नित्य मिला करते हैं, तृण-तृण पर मुक््ता भार झिला करते हैं। निधि खोले दिखला रही प्रकृति निज माया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।
(ग) जहाँ साँझ-सी जीवन छाया, ढीले अपनी कोमल काया, नील नयन से ढुलकाती हो, जिस गंभीर मधुर छाया A विश्व चित्रपट चल माया में-- विभुता विभु सी पड़े दिखाई दुःख-सुख वाली, सत्य बनी रे।
(घ) वह आता- पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक, चल रहा लकूटिया टेक, मुद्ठो-भर दाने को-भूख मिटाने को मुँह फटी पुरानी झोली का फैलाता- (ड) पथ को न मलिन करता आना, पद-चिह्न न दे जाता जाना, सुधि मेरे आगम की जग में सुख की सिहरन हो अंत खिली विस्तृत नभ का कोई कोना, मेरा न कभी अपना होना, परिचय इतना इतिहास यही उमड़ी कल थी मिट आज चली !
Q2.भारतेन्दुयुगीन हिन्दी काव्य की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।
Q3.द्विवेदी युग की साहित्यिक प्रवृत्तियों का परिचय दीजिए।
Q4.मैथिलीशरण गुप्त के इतिहास-बोध और मानवतावादी दृष्टिकोण की चर्चा कीजिए।
Q5.रामनरेश त्रिपाठी के काव्य-सौन्दर्य का विवेचन कौजिए।
Q6.छायावाद के प्रमुख कवियों और उनके रचना-संसार पर प्रकाश डालिए।
Q7.जयशंकर प्रसाद की सौन्दर्य चेतना को रेखांकित कीजिए।
Q8.“निराला' काव्य की अन्तर्वस्तु को स्पष्ट कीजिए।
Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :
(क) महादेवी वर्मा की वेदनानुभूति
(ख) प्रतापनारायण मिश्र
(ग) अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
(घ) छायावाद की पृष्ठभूमि