BHDC-133 · December 2024 · हिन्दी

IGNOU BHDC-133 December 2024 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDC-133

Structured previous year question paper for BHDC-133, December 2024 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 BHDC-133

स्नातक उपाधि कार्यक्रम ( सामान्य )

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2024

बी.एच.डी.सी.-1833 : आधुनिक हिन्दी कविता

समय / 3 घण्टे अधिकवम अक : 100

We: ea Wa wea को उत्तर दीजिए। पहला प्रश्न

अनिवार्य है।

Q1.निम्नलिखित काव्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36 अपने पैरों पर खड़ी आप चलती हूँ। श्रमवारिबिन्दु फल स्वास्थ्यमुक्ति फलती हूँ, अपने अंचल से व्यंजन आप झलती हूँ। तनु-लता-सफलता-स्वादु आज ही आया, मेरी कुटिया में राज-भवन मन भाया।

(ख)मनमोहिनी प्रकृति की जो गोद में बसा हे, सुख स्वर्ग-सा जहाँ है, वह देश कौन-सा है ? जिसका चरण निरंतर रत्नेश थो रहा हे, जिसका मुकुट हिमालय, वह देश कौन-सा है ? नदियाँ जहाँ सुधा की धारा बहा रही हें, सींचा हुआ सलोना, वह देश कौन-सा है ?

(ग) कोई न छायादार पेड़ वह जिसके तले बैठी हुई स्वीकार; श्याम तन, भर बँधा यौवन, नत नयन, प्रिय कर्मरत मन, गुरु हथौड़ा हाथ, करती बार-बार प्रहार-- सामने तरु-मालिका अटूटालिका प्राकार।

(घ) हृदय के प्रणय कुंज में लीन मूक कोकिल का मादक गान, बहा जब तन मन बन्धन हीन मधुरता से अपनी अनजान खिल उठी रोओं-सी तत्काल पल्‍लवों की पुलकित डाल। (ड) मेरा पग-पग संगीत भरा, श्वासों से स्वप्न-पराग झरा, नभ के नवरंग बुनते दुकूल, छाया में मलय-बयार पली ! मैं क्षितिज-भूकुटि पर घिर धूमिल, चिंता का भार बनी अविरल, रज-कण पर जल-कण हो बरसी नवजीवन-अंकुर बन निकली !

Q2.भारतेन्दुयुगीन हिन्दी काव्य की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालिए।

Q3.द्विवेदीयुगीन काव्य के अभिव्यंजना शिल्प को रेखांकित कीजिए।

Q4.हरिऔध के साहित्य की प्रमुख प्रवृत्तियों की चर्चा

Q5.मैथिलीशरण गुप्त के काव्य में निहित नारी सम्मान की भावना पर प्रकाश डालिए।

Q6.छायावाद के रचना विधान को स्पष्ट कीजिए

Q7.जयशंकर प्रसाद की कविता के मूल स्वर को रेखांकित

Q8.सुमित्रानंदन पंत की काव्यानुभूति और उनके जीवनदर्शन पर प्रकाश डालिए।

Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) पंडित राधाचरण गोस्वामी और राधाकृष्ण दास

(ख) निराला की काव्य-संवेदना

(ग) महादेवी वर्मा की काव्यभाषा

(घ) रामनरेश त्रिपाठी