MHD-12 · June 2019 · हिन्दी

IGNOU MHD-12 June 2019 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

भारतीय कहानी (Indian Story)

Structured previous year question paper for MHD-12, June 2019 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा

05595 जून, 2019 ह

एम.एच.डी .-12 : भारतीय कहानी

समय : 2 घण्टे अधिकतंग्र अंक ;: 50

नोट: प्रथम अर अनिवार्य है । शेष में से किन्हीं तीन प्रनों के उत्त

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्ो- की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) चेन्नम्मा ने मुँह न खोला । सिर फिर से झुका लिया । मेरे देखते ही देखते आँसू की दो चमचमाती बूँदें उसके गालों पर से फिसल गईं | वही उसका दिया मौन उत्तर था । उसकी शुभ्र आत्मा को घेरे अज्ञान के पर्दे को उतार फेंकना मेरा काम था । किसी भी स्थान पर पहुँचने के लिए एक रास्ता पकड़कर उस पर कदम रखकर चलते-चलते वह स्थान समीप ही आएगा, इस विश्वास में बहुत दूर चलने के बाद कोई रास्ते में मिले और यह कहे कि हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं वह ठीक रास्ता नहीं, बल्कि हम अपने गंतव्य से दूर चले जा रहे हैं, तो कैसा लगेगा ? मैंने अपनी बातों से चेन्नम्मा के मन पर लगभग ऐसा ही प्रभाव उत्पन्न किया

(ख) उसके बाद वे रोज की तरह बाज़ार भी गए थे । हालांकि सवेरे बड़ा लड़का नौकर के साथ बाज़ार जाकर जरूरत की सारी चीज़ें ले आता है । मगर जब लड़के ऑफिस चले जाते तो अविनाश एक बार फिर फटाफट बाज़ार घूमने निकल जाते और कुछ न कुछ अखादय चीज़ लाकर हाजिर कर देते, जिसे वे सब छूते भी नहीं । थोड़ा पुई साग, मुखी कचू, मौरला पुटी ये, सब चीज़ें भला कोई आदमी खाता है । नहीं खाता तो फिर बाज़ार में बिकती क्‍यों हैं ! छोड़ो, कोई खाए न खाए, अविनाश ये सब अकेले खाएँगे । आजकल वे शैलबाला को समझाते रहते हैं कि ये सब चीज़ें खाने से आदमी की सेहत ठीक रहती हैं । मगर उन्हें तो जैसे इन बातों से कोई मतलब ही न हो । फैशन परस्त बेटे-बहुओं की बातों पर ज्यादा ध्यान देती हैं | मगर अविनाश को उनके इस तरह अपनी बातें अनसुनी चली जाने का गम नहीं है । आज बहू के सामने ही उन्होंने खूब सारी चच्चड़ी खाई ।

(ग) ठेकेदार के साथ जय चुपचाप चलने लगा । उसके पीछे दुःखित भानी चल रही थी । आत्मक्लेश से उसे बुख़ार चढ़ आया था, चेहरा सफ़ेद हो गया था और गला सूख गया था । वह पसीना-पसीना हो गई थी, भारी क़दमों से चल रही थी और उसका हृदय छलनी हो रहा था । ठेकेदार और जय घाटकोपर के एक विभाग में आ गए | वो हिस्सा बहुत तंग था । वहाँ भैंस के बड़े-बड़े तबेले और छोटे-छोटे कारखाने हैं । छोटी-बड़ी चालें और झोपड़-पट्टियों की भीड़ है और इस विशाल जनसंख्या की सुविधा के लिए बत्तीस शौचालय हैं । उन शौचालयों के पास रुककर ठेकेदार बोला, “यह है तेरा काम । यहाँ गाड़ी लाकर रुकने पर भीतर जा कर अंदर रखे डिब्बे गाड़ी में डालने हैं । साफ करके रखने हैं | शौचालय का ऊपरी हिस्सा, सीढ़ियाँ और यह अगल-बग़ल की गंदगी धोकर सफाई करना है । काम ठीक से नहीं किया तो नौकरी साहब की जेब में चली जाएगी । आज तक़लीफ़

(घ) राजमद की धुँध के कारण राजा को कुछ सूझता ही नहीं था । कबीर की जबान से मौत का नाम सुनकर राजा को पहली मर्तबा ध्यान आया कि देर-सवेर मौत तो सबको आनी ही है । पर उसकी बात अलग है । वो देश का मालिक है । आवाज को दबाकर कहने लगा, “कबीर, एक बात तो बता ! देख, सही-सही कहना । मुझे तुझ पर भरोसा है । यह नौकूँटी राज्य का सिंहासन, यह अखूट खजाना, सह विशाल फौज, ये चमचमाती तलवारें और ये हाथी-घोड़े तक क्‍या इस मरी मौत से मेरी रक्षा नहीं कर सकते ? क्या नाचीज रिआया की तरह मुझे भी एक दिन मरना होगा ?”

Q2.दीदी कहानी की कथा-वस्तु का विश्लेषण कीजिए ।

Q3.तमिल कहानी के विकास में डी. जयकांतन के अवदान पर प्रकाश डालिए.।

Q4.ओड़िया कहानियों में चित्रित आदिवासी जीवन का विश्लेषण कीजिए ।

Q5.कोंकणी के कहानी संसार पर प्रकाश डालते हुए मीना काकोडर के योगदान की चर्चा कीजिए ।

Q6.“जवाबी कार्ड” कहानी का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए ।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए ; - 96-70 -

(क) 'ाँच-पत्र' कहानी का जीवन-दर्शन

(ख) अमृता प्रीतम

(ग) 'दूजौ कबीर कहानी की मूल संवेदना

(घ) कालीपट्नम रामाराव