MHD-11 · December 2018 · हिन्दी

IGNOU MHD-11 December 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिंदी कहानी (Hindi Story)

Structured previous year question paper for MHD-11, December 2018 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

सत्रांत परीक्षा े

एाउःडछव दिसम्बर, 2018

एम.एच.डी.-11 : हिन्दी कहानी

me: ग्रथय ग्रश अनिवार्य है । शेष अनों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के

उत्तर दीजिए /

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं क्रो की सन्दर्भ-सहित व्याख्या कीजिए : 2x10=20-

(क) अब शकलदीप बाबू और भी व्यस्त रहने लगे । पूजा-पाठ का उनका कार्यक्रम पूर्ववत्‌ जारी था । लोगों है . से बातचीत करने में उनको काफ़ी मज़ा. आने लगा और वे बातचीत के दौरान ऐसी स्थिति उत्पन्न कर देते कि हि ' लोगों को कहना पड़ता कि नारायण अवश्य ही ले लिया जाएगा । वे अपने घर पर एकत्रित नारायण तथा उसके मित्रों की बातें छिषकर सुनते और कभी-कभी अचानक उनके दल में घुस जाते तथा ज़बरदस्ती बात - करने लगते । कभी-कभी नारायण को अपने पिता की यह हरकत बहुत बुरी लगती और वह क्रोध में दूसरी ओर देखने लगता । रात में शकलदीप बाबू चौंककर उठ बैठते और बाहर आकर कमेरे में लड़के को सोते देखने लगते या आँगन में खड़े होकर आकाश को

(ख) और अगर यह सच है तो यह भी सही है कि उनकी संस्कृति और आत्मा का संकट हमारी संस्कृति और आत्मा का संकट है । यही कारण है कि आजकल के लेखक और कवि अमरीकी, ब्रिटिश तथा यूरोपीय साहित्य तथा विचारधाराओं में गोते लगाते हैं और वहाँ से अपनी आत्मा को शिक्षा और संस्कृति प्रदान करते हैं ! क्या यह झूठ है ? बोलो कि झूठ है ? हमारे तथाकथित राष्ट्रीय अख़बार और प्रकाशन-केन्द्र ! वे अपनी विचारधारा और दृष्टिकोण कहाँ से लेते हैं ?

(ग) “मेरा हाल तो ख़ुदा जानता है । चिराग वहाँ साथ होता, तो और बात थी, ... मैंने उसे कितना समझाया था कि मेरे साथ चला चल । पर वह ज़िद पर अड़ा रहा कि नया मकान छोड़कर नहीं जाऊँगा - यह अपनी गली . है, यहाँ कोई ख़तरा नहीं है । भोले कबूतर ने यह नहीं सोचा कि गली में ख़तरा न हो, पर बाहर से तो ख़तरा हो सकता है, मकान की रखवाली के लिए चारों ने अपनी जान दे दी । रक्‍्खे, उसे तेरा बहुत भरोसा था । कहता था कि रक्खे के रहते मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता । मगर जब जान पर बन आयी तो रकक्‍्खे के रोके

(घ) बारह साल की सिलिया डरी, सहमी-सी एक कोने में खड़ी थी और मामी अपनी बेटी मालंती को बाल पकड़कर मार रही थी, साथ ही ज़ोर-ज़ोर से चिललाकर कहती जा रही थी, “क्यों री, तुझे नहीं मालूम, अपन वा कुएँ से पानी नहीं भर सके हैं ? क्यों चढ़ी तू वा कुआँ पर, क्यों रस्सी-बाल्टी को हाथ लगाया ?” और वाक्य है पूरा होने के साथ ही दो-चार झापड़, घूँसे और बरस पड़ते मालती पर । बेचारी मालती, दोनों बाँहों में अपना मुँह छिपाए चीख़-चीख़कर रो रही थी । साथ ही कहती जा रही थी, “ओ बाई, माफ़ कर दो, अब ऐसा कभी

Q2.“अमरकांत की डिप्टी कलक्टरी' प्रतीक्षा, मोहभंग और हताशा की कहानी है” - इस कथन की समीक्षा कीजिए ।

Q3.शेखर जोशी की कहानियों पर विचार करते हुएं उनकी ऑआँचलिक दृष्टि को रेखांकित कीजिए ।

Q4.Tene कहानी की अभन्तर्वस्तु पर विचार कीजिए ।

Q5.साठोत्तरी कहानी पर विचार करते हुए सुख” कहानी का महत्त्व निर्धारित कीजिए ।

Q6.“at बिन्दी' कहानी में अभिव्यक्त स्त्री-दृष्टि का मूल्यांकन कीजिए ।

Q7.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :. 96-70

(क) नई कहानी

(ख) कथाकार रवीन्द्र कालिया

(ग) “यही सच हैं का महत्त्व...

(घ) कथाकार ज्ञानरंजन