MHD-1 · June 2018 · हिन्दी

IGNOU MHD-1 June 2018 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिंदी काव्य-1 (Hindi Poetry-1)

Structured previous year question paper for MHD-1, June 2018 session (Hindi medium).

Questions: 7

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

एम .एच.डी.-1 : हिन्दी काव्य-1

(आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य)

समय : 2 घण्टे ः MET अंक : 50

We: कुल चार प्रश्नों के उत्तर देने हैं / प्रथम गन अनिवार्य है / शेष

अरनों में से किन्हीं तीन अरनों के उत्त दीजिए /

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं क्रो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 2x10=20 oR दोहुन राह न पाई । : हिंदू अपनी करे बड़ाई गागर छुवन न देई । वेस्या के पाइन-तर सोवै यह देखो हिंदुआई । ; मुसलमान के पीर-औलिया मुर्गी मुर्गा खाई । खाला केरी बेटी ब्याहैं घरहि में करै सगाई । बाहर से इक मुर्दा लाये धोय-धाय चढ़वाई । सब सखियाँ मिलि जेंवन बैठीं घर-भर कौ बड़ाई । हिंदुन की हिंदुवाई देखी तुरकंन की तुरकाई । 'कहैं कबीर सुनो भाई साधो कौन राह है जाई ।

(ख) मेरें जाति-पाँति न चहौं काहकी जाति-पाँति । मेरे कोऊ कामको न हौं काहूके कामको । लोकु परलोकु रघुनाथही के हाथ सब, भारी है भरोसो तुलसीके एक नामको I अति ही अयाने उपखानो नहि बूझैं लोग, साह ही को गोतु गोतु होत है गुलामको ॥। साधु कै असाधु कै भलो कै पोच, सोचु कहा, का काहू के द्वार परौं, जो हीं सो हों रामको ॥॥

(ग) माई री म्हा लियाँ गोविन्दाँ मोल ।। टेक ।। थे कहयाँ छाणे म्हाँ काँचोड़ूडे लियाँ बजन्ता ढोल । थे कहयाँ मुंहौधे म्हाँ कहयाँ सस्तो, लिया री ताजाँ तोल । मीरा कूँ प्रभु दरसणं दीज्याँ पूरब जणम की कोल ।। ,

(घ) अति सूधो सनेह को मारग है जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं । तहाँ साँचे चलें तजि आपनपौ झझकें कपटी जे निसाँक नहीं । घनआनंद प्यारे सुजान सुनौ यहाँ एक तें दूसरी आँक नहीं । तुम कौन धौं पाटी पढ़े हौ कहौ मन लेहु पै देहु छटाँक नहीं ।।

Q2.पृथ्वीराज रासो' में वर्णित प्रसंगों का विवेचन कीजिए ।

Q3.क्या कबीर अद्वदैतवादी थे ? विचार कीजिए ।

Q4.तुलसीदास की विचारधारा का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए ।

Q5.भक्ति-साहित्य में मीरा का महत्त्व क्या है ? विचार कीजिए ।

Q6.पदमाकर के काव्य-कौशल पर विवेचनात्मक निबंध लिखिए।

Q7.निम्नलिखित में से किसी एक पर टिप्पणी लिखिए : 10

(क) विद्यापति का काव्य-सौंदर्य (खं) सूरदास के काव्य में प्रेम