MHD-1 · December 2014 · हिन्दी

IGNOU MHD-1 December 2014 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

हिंदी काव्य-1 (Hindi Poetry-1)

Structured previous year question paper for MHD-1, December 2014 session (Hindi medium).

Questions: 8

Verified: 26 Jul 2026

हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)

o4505 सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2014

एम.एच .डी.-1 : हिन्दी काव्य-1

(आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य)

समय : 2 घण्टे अधिकवम अंक : 60

पा प्््य्पभथपयतपथयियाउ्काद-+

नोट: कुल चार डरनों के उत्त ढेने हैं / प्रथम प्र अनिवार्य है ।

शेष में से किन्हीं तीन अरनों के उत्त दीजिए /

Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं क्रो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 2x10=20

(क) [...] (this portion is being re-verified) अस बाउर जीऊ | पपिहा निति बोले 'पिउ पिऊ! ॥ अधिक काम दाघे सो रामा । हरिलेइ सुवा गएउ जिउ नामा ॥ बिरह बान तस लाग न डोली । रकत पसीज, भीजि गइ चोली ।। हरे हरे प्रान तजहि सब नारी ।। « खन एक आव पेट महँ साँसा । खनहिं जाइ पिउ, होई निरासा ।। पवन डोलावहिं सीयहिं चोला । पहर एक समुझहिं मुख बोला ।। प्रान पयान होत को राखा ? को सुनाव पीतम कै भाखा ?

(ख) धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूत कहौ, जोलहा कहौ we | काहूकी बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ । तुलसी सरनाम गुलामु है राम को, जाको रूचै सो कहै कछु ओऊ । माँगि कै खैबो, मसीतको सोइबो, लैबेको एकु न दैबेको दोऊ ।

(ग) दृग उरझत टूटत कुटुम, जुरत चतुर चित प्रीति । परति गाँठि दुरजन हियै दई, नई, यह रीति ॥

(a) झलकै अति सुन्दर आनन गौर, छके दृग राजत काननि छवे । हँसि बोलन मैं छबि फूलन की बरषा उर ऊपर जाति है । लट लोल कपोल कलोल करै, कल-कंठ बनी जलजावलि दूवै । अंग-अंग तरंग उठै दुति की, परिहै मनौ रूप अबै धर च्वै ॥

Q2.गीतिकाब्य के रूप में विद्यापति-पदावली का मूल्यांकन कीजिए |

Q3.वर्तमान सन्दर्भों में कबीर की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए ।

Q4.पदमावत में चित्रित लोकजीवन को रेखांकित कीजिए ।

Q5.सूर-काव्य में निहित प्रेमानुभूति के स्वरूप को स्पष्ट कीजिए ।

Q6.तुलसी के काव्य-सौन्दर्य का विवेचन कीजिए ।

Q7.घनानद की प्रेम-सम्बन्धी दृष्टि का आकलन कीजिए ।

Q8.पद्माकर की कविता में प्रकृति और लोक जीवन सम्बन्धी चित्रण की विशेषताएँ बताइए ।