MHD-1 · June 2010 · हिन्दी
IGNOU MHD-1 June 2010 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिंदी काव्य-1 (Hindi Poetry-1)
Structured previous year question paper for MHD-1, June 2010 session (Hindi medium).
Questions: 8
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि ( एम.एच.डी. )
x सत्रांत परीक्षा
8 जून, 2010
एम.एच.डी.-1 : हिन्दी काव्य-1
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट: कुल चार प्रश्नों के उत्तर देने हैं। प्रथम प्रश्न अनिवार्य है। शेष में
से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
Q1.निम्नलिखित में से किन्ह्ीं दो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : (७) सनन््तों, सहज समाधि भली। .. 10x2=20 साँई ते मिलन भयो जा दिन तें सुरत न अन्त चली॥ आँख न मूँदूँ कान न रूँधू काया कष्ट न धारूँ। खुले नैन मैं हँस हँस देखूँ, सुन्दर रूप निहारूँ॥ कहूँ सो नाम सुनूँ सो सुमिरन, जो कुछ करूँ सो पूजा। “गिरह-उद्यान एकसन' देखूँ, ' भाव' मिटाऊँ दूजा॥ (७0) निर्गुन कौन देसे को बासी ? मधुकर ! हँस समुझाय, सौंह दै बूझति साँच, न हाँसी ॥ को है जनक, जननि को कहियत, कौन नारि, को दासी ? कैसो बरन भेस है कैसो केहि रस में अभिलासी। पावैगो पुनि कियो आपनो जो रे! कहैगो गाँसी। सुनत मौन है रह्यो ठग्यो सो सूर सबै मति नासी॥ (०) बतरस लालच लाल की मुरली धरी लुकाइ। सौंह करें भौं हनु हँसै, दैन कहैं नटि जाइ॥ चिरजीवौ जोरी जुरै क्यौं न सनेह गँभीर। को घटि, ए वृषभानुजा वे हलघर के बीर॥ (०) तब तौ छबि पीवत जीवत हैं, अब सोचन लोचन जात जरे। हित पोष के तोष सुप्रान पले, बिललात महा दुख दोष भरे। धन आनंद मीत सुजान बिना सब ही सुख-साज-समाज टरे। तब हार पहार से लागत हे अब आनि कै बीच पहार परे॥
Q2.विद्यापति के गीतिकाव्य का सोधाहरण विवेचन कीजिए।
Q3.वर्तमान समय में कबीर की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए।
Q4.सूफीमत में प्रेमाख्यानक परम्परा पर प्रकाश डालिए।
Q5.सगुठा भक्ति में सूरदास का स्थान निर्धारित कीजिए।
Q6.मीरा की विरह-भावना पर विचार कौजिए।
Q7.भक्त कवि के रूप में तुलसीदास का आलोचनात्मक मूल्यांकन 10 कीजिए।
Q8.धनानंद की प्रेमानुभूति में स्वच्छंदता की अभिव्यक्ति किस प्रकार 10 हुई है, स्पष्ट कीजिए।