MHD-1 · December 2017 · हिन्दी
IGNOU MHD-1 December 2017 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिंदी काव्य-1 (Hindi Poetry-1)
Structured previous year question paper for MHD-1, December 2017 session (Hindi medium).
Questions: 6
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
10611 दिसम्बर, 2017
एम.एच.डी.-1 : हिन्दी काव्य-1
(आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य)
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 60
नोट: कुल चार ग्रनों के उत्तर देने हैं / प्रथम अशन अनिवार्य है / शेष
अं में से किन्हीं तीन अरनों के उत्तर दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं ढ्ो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) जाग पियारी अब का सोवै । रैन गई दिन [...] (this portion is being re-verified) GA II जिन जागा तिन मानिक पाया । तैं बौरी सब सोय गँवाया ।। पिये तेरे चतुर तू मूरख नारी । कबहुँ न पिय की सेज सँवारी ।॥ तैं बौरी बौरापन कीन्ही । भर-जोवन पिय अपन न चीन्ही ।। जाग देख पिय सेज न तेरे । we कबीर सोई धुन जागै । शब्द-बान उर-अन्तर लागै ॥
(ख) किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी भाट, चाकर, चपल नट, चोर, चार, चेटकी । पेटको पढ़त, गुन गढ़त, चढ़त गिरि, अटत गहन-गन अहन अखेटकी ॥ ऊँचे-नीचे करम, धरम-अधरम करि, पेट ही को पचत, बेचत बेटा-बेटकी । तुलसी बुझाइ एक राम घनस्याम ही तें, आगि बड़वागिते बड़ी है आगि पेटकी ॥
(ग) म्हाँ गिरधर आगाँ, आगाँ नाच्यारी ॥ णाच णाच म्हाँ रसिक Renal प्रीत पुरातन जाँच्या री । स्याम प्रीत री बाँध घुँघरयाँ मोहण म्हारो साँच्यारी । लोक लाज कुलरा मरजादाँ ज़गमां णेक णा राख्यौरी । प्रीतम पल छण णा बिरारावाँ मीरा हरि रँग राच्याँरी ॥।
(घ) झलकै अति सुन्दर आनन गौर, छके दृग राजत काननि ae | हँसि बोलन मैं छबि फूलन की बरषा, उर ऊपर जाति है है । लट लोल कपोल कलोल करै, कल-कंठ बनी जलजाबलि द्वै । अंग अंग तरंग उठै दुति की, परिहे मनौ रूप अबै धर च्वै ॥॥
Q2.(पृथ्वीराज-रासो' की लोकप्रियता में साहित्यिक और साहित्येतर परम्पराओं के योगदान पर विचार कीजिए ।
Q3.कबीर के दर्शन का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए ।
Q4.क्या 'पदमावत' सूफ़ी काव्य है अथवा प्रेम काव्य ? मूल्यांकन कीजिए ।
Q5.भक्ति आंदोलन में सूर का महत्त्व क्या है ? विचार कीजिए ।
Q6.घनानंद के काव्य-कौशल पर विवेचनात्मक निबंध लिखिए।._ 10 प्र. निम्नलिखित में से किसी एक पर टिप्पणी लिखिए : 10
(क) तुलसीदास का काव्य-सौंदर्य
(ख) मीरा का समाज
(ग) पदमाकर की कविता