MHD-1 · December 2015 · हिन्दी
IGNOU MHD-1 December 2015 Previous Year Question Paper (हिन्दी)
हिंदी काव्य-1 (Hindi Poetry-1)
Structured previous year question paper for MHD-1, December 2015 session (Hindi medium).
Questions: 7
Verified: 26 Jul 2026
हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि (एम.ए. हिन्दी)
सत्रांत परीक्षा
दिसम्बर, 2015 osse1
एम.एच.डी.-1 : हिन्दी काव्य-1
(आदि काव्य, भक्ति काव्य एवं रीति काव्य)
समय : 2 घण्टे अधिकतम अंक : 50
नोट: कुल चार प्रश्नों के उत्तर देने हैं / प्रथम अरन अनिवार्य है / शेष
में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्त दीजिए /
Q1.निम्नलिखित में से किन्हीं द्रो अवतरणों की सप्रसंग व्याख्या कीजिए : 2x10=20
(क) मन ना रौँगाये रँगाये जोगी कपरा । आसन मारी मंदिर में बैठे ब्रह्म-छाँड़ि पूजन लागे पथरा ॥ कनवा फड़ाय जटवा बढ़ौले दाढ़ी बढ़ाय जोगी होई गैले बकरा । जंगल जाय जोगी धुनिया रमौले काम जराय जोगी होय गैले हिजरा ।। मथवा मुँड़ाय जोगी कपड़ा रंगीले, गीता बाँच के होय गैले लबरा । 'कहहिं कबीर सुनो भाई साधो, जम दरवाजा बाँधल जैबे पकड़ा ॥।
(ख) धूत कहौ, अवधूत कहौ, रजपूत कहौ, जोलहा कहौ कोऊ । काहकी बेटीसों बेटा न ब्याहब, काहूकी जाति बिगार न सोऊ । तुलसी सरनाम गुलामु है रामको, जाको रूचै सो कहै कछु ओऊ | माँगि कै खैबो, मसीतको सोइबो, लैबेको एकु न दैबेको दोऊ।
(ग) चरन कमल बंदौ हरि राइ । जाकी कृपा पंगु गिरि लंघै अंधे कौ सब कछु दरसाइ ॥। बहिरौ सुनै गूँग पुनि बोलै रंक चलै सिर छत्र धराइ । सूरदास स्वामी करुनामय बार बार बंदौँ तिहिँ पाइ ।।
(घ) भोर तें साँझ लौं कानन ओर निहारति बावरी नेकु न हारति । साँझ तें भोर लौं तारनि ताकिबो तारनि सों इकतार न टारति । जौ कहूँ भावतो दीठि परै घनआनंद आँसुनि औसर गारति । मोहन सोहन जोहन की लगियै रहै आँखिन कें उर आरति ।।
Q2.रासो काव्य के रूप में पृथ्वीराज रासों की काव्यगत विशेषताएँ बताइए ।
Q3.कबीर की प्रासंगिकता पर विचार कीजिए ।
Q4.'पदमावत' में चित्रित लोक जीवन पर प्रकाश डालिए ।
Q5.मीरा के काव्य में भक्ति का कौन-सा रूप उद्घाटित हुआ है ? सोदाहरण विश्लेषण कीजिए ।
Q6.श्रृंगारिक कवि के रूप में बिहारी का महत्त्व प्रतिपादित कीजिए ।
Q7.घनानंद के प्रेम संबंधी दृष्टिकोण पर सोदाहरण विचार कीजिए ।