BPYC-133 · December 2023 · हिन्दी

IGNOU BPYC-133 December 2023 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

LOGIC

Structured previous year question paper for BPYC-133, December 2023 session (Hindi medium).

Max marks: 100 · Questions: 8

Verified: 24 Aug 2026

स्नातक ( सामान्य ) दर्शनशास्त्र

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2023

बी.पी.वाई.सी.-183 : तक॑शास्त्र

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक ; 100

नोट : 6) सभी पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

(४) सभी प्रश्नों के अंक समान हैं।

(४) प्रश्न क्रमांक # एवं 9 का उत्तर लगभग 400-

400 शब्दों में लिखिए।

(०) वर्णनात्मक प्रकृति के लिए ही शब्द-सीमा की

अनिवार्यता है।

Q1.परम्परागत विरोध वर्ग पर टिप्पणी लिखिए 20 उभयतःपाश क्‍या है ? उभयतःपाश का परिहार कैसे किया जा सकता है ?

Q2.भारतीय तककशास्त्र की मुख्य विशेषताएँ क्‍या हैं ? यह पाश्चात्य तर्कशास्त्र से कैसे भिन्‍न है ? 20 आगमनात्मक तर्क क्‍या है ? आगमनात्मक तर्क की

Q3.निम्नलिखित में से किन्हीं वो प्रश्नों के उत्तर लगभग 200-200 शब्दों में दीजिए : (अ) अस्तित्वाचक आशय की परिभाषा कीजिए। 10 (आ) उचित उदाहरणों सहित परार्थानुमान की चर्चा कौजिए। 10 (३) वेन डायग्राम की सहायता से निम्नलिखित की वैधता का परीक्षण कीजिए : 2.5x4=10

(3) पद्‌ को परिभाषित कीजिए। निरपेक्ष प्रतिज्ञप्तियों में पदों के वितरण (व्याप्ति) से आप क्‍या समझते हैं?

Q4.निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लगभग 150-150 शब्दों में दीजिए ;: (अ) निगमनात्मक तर्कशास्त्र में वैधता की अवधारणा पर टिप्पणी लिखिए। 5 (आ) अरस्तू के तकशास्त्र एवं विधेयात्मक तक॑शास्त्र के मध्य अन्तर कीजिए। 5 (इ) आगमनात्मक तर्क एवं निगमनात्मक तर्क के मध्य अन्तर कीौजिए। 5 (ई) निम्नलिखित प्रतिज्ञप्तियों के परिवर्तन एवं प्रतिवर्तन का पता कीजिए : 2.5x2=5 Gi) सभी मछलियाँ स्तनपायी नहीं हें। (उ) यदि, “सभी पुरुष नश्वर हैं।” असत्य है, तो निम्नलिखित प्रतिज्ञप्तियों का सत्यता मूल्य क्‍या होगा ?

Q5.कोई भी पुरुष नश्वर नहीं है।

Q6.कुछ पुरुष नश्वर हैं।

Q7.कुछ पुरुष नश्वर नहीं हैं।

(iv) सभी नश्वर पुरुष हैं। (४) कुछ नश्वर पुरुष नहीं हैं। (ऊ) प्रतिज्ञप्ति एवं वाक्य के मध्य अन्तर कीजिए। .

Q8.निम्नलिखित में से किन्हीं पाँच पर लगभग 100-100 शब्दों में टिप्पणियाँ लिखिए : प्रत्येक 4 (अ) संकेतार्थ (आ) शेषवत अनुमान (३) हेत्वाभास (ई) पुनरुक्ति (उ) असत्य कारण का दोष (ऊ) वस्तुगत आपादान (ए) सत्यता फलन (ऐ) सुविचारित सूत्र