BHDC-112 · December 2024 · हिन्दी

IGNOU BHDC-112 December 2024 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDC-112

Structured previous year question paper for BHDC-112, December 2024 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 BHDC-112

बी. ए. ( ऑनर्स ) हिंदी (बी. ए. एच. डी. एच. )

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2024

बी.एच.डी.सी.-112 : हिंदी निबंध और

अन्य गद्य विधाएँ

समय / 3 घण्टे अधिकवम अक : 100

नोट : कुल प्राँच प्रश्नों को उत्तः दीजिए। प्रथम प्रश्न

अनिवार्य है।

Q1.निम्नलिखित गद्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) दुःख की श्रेणी में प्रवृत्ति के विचार से करुणा का उल्टा क्रोध है। क्रोध जिसके प्रति उत्पन्न होता है, उसकी हानि की चेष्टा की जाती है। करुणा जिसके प्रति उत्पन्न होती है उसकी भलाई का उद्योग किया जाता है। किसी पर प्रसन्‍न होकर भी लोग उसकी भलाई करते हैं। इस प्रकार पात्र की भलाई की उत्तेजना दुःख और आनंद दोनों ही श्रेणियों में रखी गई है।

(ख) लेखक देवदारु पेड़ का उल्लेख करते हुए कहता है जिस आचार्य ने पतिपाटी विहित निष्टजना नुमोहित 'सज्जा' को “छाया” नाम दिया था वह जरूर इस पेड़ की शोभा से प्रभावित हुआ था। पेड़ क्या है, किसी सुलझे हुए कवि के चित्त का मूर्तिमान छन्द है--धरती के आकर्षण को अभिभूत करके लहरदार वितानों की श्रृंखला को सावधानी से सँभालता, हुआ विपुल-व्योम की ओर एकाग्रीभूत मनोहर छंद। कैसी शान है, गुरुत्वाकर्षण के जड़-वेग को अभिभूत करने की कैसी स्पर्धा है-प्राण के आवेग की कैसी उल्लासकार अभिव्यक्ति है।

(ग) और यह मार्ग हमारी नागरिकता पर एक व्यंग्य के समान है। फाटक पर दोनों ओर स्पष्ट लिखा है-- आम रास्ता नहीं है।' अब सोचता हूँ कि आम रास्ता किसे कहते हैं ? अवश्य ही यह कोई खास रास्ता है। आम लोगों का रास्ता तो दूसरा है। ये शायद भूले हुए लोग हैं। ये मार्गच्युत लोग हैं। ये अनजान लोग हैं। हे भगवान न जाने कब इन्हें अभीष्ट पथ का ज्ञान होगा।

(घ) मेरा यह विश्वास हो गया है कि आज शक्तिशाली वे ही हो सकते हैं, जो या तो अपने और दूसरों के अड़े हुए और अड्ने योग्य काम चालू कर सकें या दूसरों के चालू कामों में अडुंगा डाल सकें। जो ऐसा नहीं करते हैं, उन्हें सहदय व्यक्ति मुँह विचकाकर 'भले आदमी' की उपाधि दे डालते हैं। अर्थात्‌ अप्रत्यक्ष रूप से कहना चाहते हैं कि ये महाशय उसी कोटि के व्यक्ति हैं, जिस कोटि के लोग ऊँचे सिद्धान्तों की बातें चाहे जितनी बघार लें, काम की एक नहीं जानते।

Q2.निबन्ध के भेदों को विस्तार से समझाइए।

Q3.“मजदूरी और प्रेम” निबन्ध की अन्तर्वस्तु पर प्रकाश डालिए॥

Q4.“करुणा” निबन्ध का प्रतिपाद्य लिखिए।

Q5.“प्रसाद प्राचीन इतिहास के गड़े मुर्दे उखाड़ा करते हैं।” इस कथन की समीक्षा कीजिए।

Q6.“रजिया" रेखाचित्र में अलंकार और बिम्ब विधान का सुन्दर प्रयोग हुआ है, विवेचन कीजिए।

Q7.स्वातंत्र्योत्तर युग में संस्मरण लेखन परम्परा के विकास पर प्रकाश डालिए।

Q8.प्रो. शशांक समय को धन क्‍यों नहीं मानते ? स्पष्ट कीजिए।

Q9.“देवदारुः निबन्ध के कथानक पर अपना अभिमत दीजिए।