BHDC-112 · June 2025 · हिन्दी

IGNOU BHDC-112 June 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BHDC-112

Structured previous year question paper for BHDC-112, June 2025 session (Hindi medium).

Questions: 9

Verified: 10 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 5 BHDC-112

बी. ए. (ऑनर्स) हिन्दी

सत्रांत परीक्षा

जून, 2025

बी.एच.डी.सी.-112 : हिन्दी निबंध और अन्य गद्य

विधाएँ

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

नोट: कुल पाँच प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रथम प्रश्न अनिवार्य है।

Q1.निम्नलिखित गच्यांशों में से किन्हीं तीन की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 3x12=36

(क) हल चलाने वाले और भेड़ चराने वाले प्राय: स्वभाव से ही साधु होते हैं। हल चलाने वाले अपने शरीर का हवन किया करते हैं। खेत उनकी हवनशाला है। उनके हवनकुंड की ज्वाला की किरणें चावल के लम्बे और सफेद दानों के रूप में निकलती हैं। गेहूँ के लाल-लाल दाने इस अग्नि की चिनगारियों की डालियों से हैं। मैं जब कभी अनार के फूल और फल देखता हूँ तब मुझे बाग के माली का रुधिर याद आ जाता है। उसकी मेहनत के कण जमीन में गिरकर उगे हैं।

(ख) जिसका ऐश्वर्य से अभिषेक हो रहा था, वह निर्वासित हो गया। उत्कर्ष की ओर उन्मुख समधष्टि का चैतन्य अपने ही घर से बाहर कर दिया गया, उत्कर्ष की मनुष्य की ऊर्ध्वोन्मुख चेतना की यही कीमत सनातन काल से अदा की जाती रही है। इसीलिए जब कीमत अदा कर दी गयी तो उत्कर्ष कम-से-कम सुरक्षित रहे, यह चिंता स्वाभाविक हो जाती है।

(ग) बनारस के पुराने रईसों, पण्डितों, नर्तकों, लावनीबाजों, गुण्डों, गायिकाओं और फक्‍्कड़ों की बहुत-सी अद्भुत कहानियाँ सुनाया करते थे, जो मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी होती थीं और जिनसे पता चलता था कि उस अतीत युग के गुणी और कलावंत कितने उदार तथा निष्ठावान होते थे। रईसों की गरीब- निवाजी, पंडितों का स्वाभिमान, नर्तकों की नृत्य निपुणता, लावनीबाजों की रचना-चातुरी, गुण्डों का निर्बलों की सहायता में सहयोग, गायिकाओं का मर्यादा पालन और फक्‍कड़ों की गरीबपरवरी उनसे सुनकर उस युग का दृश्य मनश्चक्षुओं के सामने आ जाता था। मासिक “हंस” का जो काशी अंक निकला था उसमें उनके लिखवाये हुए कई ऐसे आलेख छपे थे।

(घ) प्राय: उनके छात्र और मित्र कहा करते हैं कि उनकी स्मृति-शक्ति अद्भुत है, किंतु यह सच नहीं है, अद्भुत तो उनकी विस्मृति शक्ति है। अप्रयोजनीय बातों को वे इतनी आसानी से भूल जाते हैं जैसे किसी ने पट्टी पर लिखे हुए को गीले कपड़े से पोंछ दिया हो। अवश्य ही इसकी लपेट में कई ऐसी बातें भी आ जाती हैं जो उनकी पत्नी या परिवार वालों या मित्रों की दृष्टि में अत्यंत प्रयोजनीय होती हैं, और जिनके लिए कभी-कभी उन्हें डाँट भी खानी पड़ती है, किंतु उस समय वे बहुत भूला चेहरा बनाकर मिर्जा गालिब की पंक्ति पढ़ते हैं “भूल जाना है निशानी मेरी ।”

Q2.निबंध के उद्भव एवं विकास पर प्रकाश डालिए।

Q3.“करुणा! निबंध के शीर्षक की सार्थकता प्रतिपादित कीजिए।

Q4.“ये हैं प्रोफेसर शशांक' पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि जेबकतरों को लेखक ने परोपकारी सज्जन क्यों कहा है।

Q5.“गिल्लू' पाठ के आधार पर कौए को एक साथ समादरित और अनादरित प्राणी क्यों कहा गया है ? स्पष्ट कीजिए।

Q6.ललित निबंध की भाषाशैली पर प्रकाश डालिए।

Q7.“देवदारु' निबंध का प्रतिपाद्य बताते हुए इस शीर्षक की सार्थकता सिद्ध कीजिए।

Q8.“मेरे राम का मुकुट भीग रहा है” निबंध की अंतर्वस्तु पर प्रकाश डालिए।

Q9.निम्नलिखित में से किन्हीं दो पर टिप्पणियाँ लिखिए :

(क) “मजदूरी और प्रेम' का सार

(ख) “आम रास्ता नहीं है' का प्रतिपाद्य

(ग) “तुम्हारी स्मृति” पाठ की विशिष्टता

(a) fee का चरित्र-चित्रण