BSKC-104 · December 2025 · हिन्दी

IGNOU BSKC-104 December 2025 Previous Year Question Paper (हिन्दी)

BSKC-104

Structured previous year question paper for BSKC-104, December 2025 session (Hindi medium).

Questions: 4

Verified: 24 Aug 2026

मुद्रित पृष्ठों की संख्या : 4 BSKC-104

बी. ए. (ऑनर्स) संस्कृत

सत्रांत परीक्षा

दिसम्बर, 2025

बी.एस.के.सी.-104 : गीता में आत्म-प्रबंधन

समय : 3 घण्टे अधिकतम अंक : 100

नोट:

(i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

(४४) प्रश्न-पत्र का उत्तर संस्कृत या हिन्दी या अंग्रेजी किसी

एक भाषा में दीजिए, किन्तु सभी प्रश्नों के उत्तर का

माध्यम एक ही भाषा हो।

Q1.निम्नलिखित में 8 fest uta की सन्दर्भ सहित व्याख्या कीजिए : 5x10=50

(क) प्रजहाति यदा कामान्‌ सर्वान्‌ पार्थ मनोगतान्‌। आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते | ।

(ख) ध्यायतो विषयान्पुंस: संगस्तेषृपजायते । संगात्सज्जायते काम: कामात्क्रोधो5ईभिजायते।।

(ग) इन्द्रियाणां हि चरतां यन्मनो5नुविधीयते। तदस्य हरति प्रज्ञां वापुर्नावमिवाम्भसि |

(घ) भूमिरानो3नलो वायु: रव॑ मनो बुद्धिरिव च। se इतीयं ये भिन्‍ना प्रकृतिरष्टधा।। (S) Gani: कृत्वा यतचिन्तेन्द्रियक्रिय:। उपविश्यासने युज्ज्यायोगमात्मविशुद्धये | ।

(च) इन्द्रियाणि मनोबुद्धिस्थाधिष्ठानमुच्यते। ल्तैरविमोहयत्येष ज्ञानमावृत्य देहिनम्‌।।

(छ) नियंत कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्कर्मण:। शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्धयेदकर्मण: ।।

Q2.निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दीजिए : 3x10=30

(6) गीता के अनुसार “आत्म-प्रबंधन' के स्वरूप पर एक लेख लिखिए।

(9) परमात्मा के साथ सायुज्य प्राप्त करने के साधनों का वर्णन कीजिए।

(1) गीता में वर्णित सामाजिक महत्व का विस्तार से वर्णन कीजिए।

(9) गीता के अनुसार आत्म-प्रबंधन की प्रक्रिया में मन और इन्द्रियों की भूमिका को स्पष्ट कीजिए। (४) मन का स्वरूप बताते हुए मानसिक द्वन्द् तथा द्न्द्दों के कारण की समीक्षा कीजिए। मन पर नियंत्रण हेतु गीता में क्या उपाय सुझाए गए हैं ? (४) शारीरिक और मानसिक अनुशासन को गीता में वर्णित उद्धरणों के माध्यम से समझाइए। (शा) सन्तुलित जीवन से क्या लाभ है ? निरूपण कीजिए।

Q3.निम्नलिखित में से किन्हीं चार पर टिप्पणियाँ लिखिए :

Q4.स्थितप्रज्ञ

(8) तपश्चर्या

(19) त्रिगुणात्मिका सृष्टि

(v) मनोनिग्रह (शं) कर्म का स्वभाव